ग़ज़ल में शेर कह करके इशारा कर दिया जाए,
कबाहत को गिराया जाए पारा कर दिया जाए।
हमारी पीठ भी ख़ंजर की नीयत को समझती है,
उसे हुशियार क़ातिल से दुबारा कर दिया जाए।
#विवेक चौहान
परिचय : विवेक चौहान का जन्म १९९४ में बाजपुर का है। आपकी शिक्षा डिप्लोमा इन मैकेनिकल है और प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी में नेपाल में ही कार्यरत हैं। बतौर सम्मान आपको साहित्य श्री,साहित्य गौरव,बालकृष्ण शर्मा बालेन्दु सम्मान सहित अन्य सम्मान भी मिले हैं। आपके सांझा काव्य संग्रह-साहित्य दर्पण,मन की बात,उत्कर्ष की ओर एवं उत्कर्ष काव्य संग्रह आदि हैं। आप मूल रुप से उत्तराखंड के शहर रूद्रपुर(जिला ऊधमसिंह नगर) में आ बसे हैं।
Fri Nov 24 , 2017
धवल कुर्तों की जेबों से, निकले अब तक आश्वासन है। झूठे वादों,झूठे स्वप्नों से, कब घर में,आता राशन है? जनता हुई बस द्रोपदी-सी, तैयार खड़ा दुशासन है। सेवा सुश्रुषा,सब बीती बातें, आँखों में बस सिंहासन है। कुंडली मार बस,बैठे इस पर, इनका यह प्यारा आसन है। गांधारी-सा पट्टी बाँधे, चलता […]