दहेज

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manorama ratale
दहेज के लोभियों को कोई
कहाँ तक है रोके,
क्योंकि जिन्होंने नियम बनाए
सबसे पहले वो ही इन्हें तोड़े।
दहेज को वे दहेज नहीं
शिष्टाचार हैं समझते,
कहते बिना कुछ दिए
बेटी को विदा नहीं करते।
कई तरह के बहाने
इनके पास होते हैं,
लेन-देन करने के तरीके
इनके कुछ खास होते हैं।
इतना लेकर भी इन
भेड़ियों का मन नहीं भरता,
और कैसे मँगाएं
इसमें ही दिमाग है चलता।
भूल जाती वो सास कि बहू भी
किसी के जिगर का है टुकड़ा,
न करो उनकी बेटी पर यूं सितम
वो कैसे सुनाएगी अपने
बीमार बाप को दुखड़ा।
बहू के पिता की मजबूरी
का फायदा उठाते हैं,
कैसे भी मरने से पहले उनके
हिस्सा लेकर आने को कहते हैं।
मायके से रूपया न लाने
पर वो दरिंदे इसे मार देते हैं,
अपनी इस करतूत पर
दुनिया के आगे आँसू बहाते हैं।
अपने ही जाल में जब ये
चालाक खुद फँस जाते हैं,
तब दिन में इन्हें तारे
जेलखाने के अंदर ही दिखाई देते हैं।
जैसा करो वैसा तो
भरना ही पड़ेगा,
आज नहीं तो कल

प्रभु को हिसाब देना ही पड़ेगा॥

#मनोरमा संजय रतले
परिचय : मनोरमा संजय रतले की जन्मतिथि- १७ मार्च १९७६ और जन्म स्थान-कटनी(मध्यप्रदेश)है। आपने अर्थशास्त्र में एमए की शिक्षा प्राप्त की है। कार्यक्षेत्र-समाजसेवा है। आपका निवास मध्यप्रदेश के दमोह में ही है।सामाजिक क्षेत्र में सेवा के लिए दमोह में कुछ समितियों से सदस्य के रुप में जुड़ी हुई हैं,तो कुछ की पूर्व अध्यक्ष हैं। लेखन में आपकी विधा-कविता,लघुकथा,लेख तथा मुक्त गीत है। आपकॊ हिन्दी लेखिका संघ दमोह से साहित्य श्री सम्मान,छत्तीसगढ़ से महिमा साहित्य भूषण सम्मान,छत्तीसगढ़ से प्रेरणा साहित्य रत्न सम्मान सहित भोपाल से
शब्द शक्ति सम्मान एवं आयरन लेडी ऑफ दमोह से भी सम्मानित किया गया है। विविध पत्रों में आपकी रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं। श्रीमती रतले के लेखन का उद्देश्य-शौक,समाज के लिए कुछ करना और विचारों की क्रांति लाना है। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।