एक देश था
एक भेष था,
एक जान थी
एक पहचान थीl
ईद थी
दिवाली थी,
हर जगह
सांझ थी
भगाली थी।
कितना सुंदर संसार था
स्वर्ग जैसा जहान था,
लग गई इसे
किसी की बुरी नज़र
पड़ गई लकीरेंl
लकीरों ने बना दिए फासले
उम्रों के फासले,
न मिटने वाले फासले।
बना दिए मुल्क
अलग-अलग।
बांट ली धरती,ज़मीन
बांट ली हवा,
पानी
रिश्ते
आकाश
संस्कृति
भाषा
धर्म
मजहब
ईमान
प्रेम
सब बांट लिया।
आख़िर यह कसूर
है किसका…?
भाई-भाई में
बो दिए बीज,
नफ़रत
घृणा
अविश्वास के।
कोई जाए
उन्हें समझाए,
हमारा उनका मिलन
करवाए
हम हैं
उनके
सगे भाई।
हमारे रिश्ते
खून के रिश्तेll
(शब्दार्थ:भगाली-सांझेदारी)
#यशपाल निर्मल
परिचय:श्री यशपाल का साहित्यिक उपनाम- यशपाल निर्मल है। आपकी जन्मतिथि-१५ अप्रैल १९७७ और जन्म स्थान-ज्यौड़ियां (जम्मू) है। वर्तमान में ज्यौड़ियां के गढ़ी बिशना(अखनूर,जम्मू) में बसे हुए हैं। जम्मू कश्मीर राज्य से रिश्ता रखने वाले यशपाल निर्मल की शिक्षा-एम.ए. तथा एम.फिल. है। इनका कार्यक्षेत्र-सहायक सम्पादक (जम्मू कश्मीर एकेडमी आफ आर्ट,कल्चरल एंड लैंग्वेजिज, जम्मू)का है। सामाजिक क्षेत्र में आप कई साहित्यक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं में सक्रिय रुप से भागीदार हैं। लेखन में विधा- लेख,कविता,कहानी एवं अनुवाद है। आपकी रचनाओं का प्रकाशन विविध माध्यमों में हुआ है। सम्मान की बात करें तो साहित्य अकादमी का वर्ष २०१५ का अनुवाद पुरस्कार आपको मिला है। ब्लॉग पर भी सक्रिय यशपाल निर्मल को
कई अन्य संस्थाओं द्वारा भी सम्मानित किया गया है। आपके लेखन का उद्देश्य- समाज में मानवता का संचार करना है।
Wed Nov 15 , 2017
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