इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी के दीप जलाना।
कुम्हार के मेहनतकश हाथों की रौनक बढ़ाना॥
मिट्टी के दीपों में बाती तेल की खुशबू , दीवाली की रंगत बढ़ाएगी।
दीए बेचने वाली बूढ़ी अम्मा,आशीर्वाद हाथ तभी लहराएगी॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
चाइनीज लड़ियों में कृत्रिमता भरी पड़ी है।
मिट्टी के दीयों संग तो साक्षात् मां लक्ष्मी द्वारे आन खड़ी है॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
दीपक की उज्जवल लौ से कीट-पतंगे सारे मर जाएंगे।
बढ़ रहे प्रदूषण पर, दीपक अनगिनत रोक लगाएंगे॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
मिट्टी के दीपकों में दिखता अपनापन है।
चाइनीज लड़िय़ों में तो बस बनावटीपन है॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
थाली में सजाना दीपक अनेक,खुशियां बिखर जाएंगी।
तम जो फैला होगा अमावस्या को,रौशनी फैल जाएगी॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
आतिशबाज़ी और पटाखों की जब चहुंओर झूम होगी,दीप रोशनी तब खूब होगी।
कृत्रिम रोशनी से तो आर्थिक तंगी होगी॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
दीप रगों में नव उत्साह,उमंग भरते हैं।
बल्ब,ट्यूबलाइट बोझ आर्थिक रूप से करते हैं॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
मिट्टी के दीपक से रोम-रोम पुलकित हो जाते हैं।
पवन में घुलती सुरभि,कीटाणु मर जाते हैं॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…।
परम्पराओं में बसती सदा सच्ची दीवाली है,दीपक परंपरा के नूर।
चीन सीमा पर बड़बड़ा रहा,मिट्टी के दीप जलाकर कर दो घमंड उसका चकनाचूर॥
इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी के दीप जलाना।
कुम्हार के मेहनतकश हाथों संग ‘धार्विक नमन’ की कविता को भी जरा चमकाना॥
#सुनील कुमार
परिचय :सुनील कुमार लेखन के क्षेत्र में धार्विक नमन नाम से जाने जाते हैं। आप वर्तमान में डिब्रूगढ़ (असम)में हैं,जबकि मूल निवास झुन्झुनूं (राजस्थान) है। शैक्षणिक योग्यता एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य,समाज शास्त्र,)सहित एम.एड., एमफिल और बीजेएमसी भी है।