गियर बदलना पड़ता है

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bipin bavara
जिंदगी एक सफर है,इसमें चलते रहना पड़ता है,
कभी धूप-कभी छांव, तो कभी बारिश में भी आगे बढ़ना रहता है।

आएंगे राहों में गड्ढे बड़े-से-बड़े,उनमें से कुछ को पार,
तो कुछ में से होकर ही निकलना पड़ता है।

अब…
माना कि आप नहीं हैं, पैदल चलने के शौक़ीन,
नहीं सुहाती भी आपको,धूप और बारिश रंगीन
तो आप होंगे अपने ख्वाबों की गाड़ी में बैठे बेहतरीन।

लेकिन हमें ज़रा एक बात ये बताएं…,
मेरी ऊपर कही इक बात पर ज़रा गौर फरमाएं
कि, रास्ते तो होंगे आपके लिए भी वही,
इनमें तो होंगे ज़रा भी बदलाव नहीं।

तो फ़िर…
आपकी इस गाड़ी को भी,
समय-समय पर गियर तो बदलना पड़ता है।

                                                                         #बिपिन पाल 
परिचय:बिपिन पाल का साहित्यिक उपनाम-बिपिन बावरा है। इनकी जन्मतिथि-१७ अप्रैल १९९७ और जन्मस्थान- जौनपुर है। वर्तमान में इलाहाबाद(उत्तर प्रदेश) में निवासरत हैं। डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजी.और बीएससी(प्रथम वर्ष)आपकी शिक्षा है। फिलहाल कार्यक्षेत्र-विद्यार्थी का है। स्वतन्त्र लेखन के अन्तर्गत पद्य और शायरी रचते हैं। ब्लॉग पर भी सक्रिय श्री पाल के लेखन का उद्देश्य- अपने आसपास होने वाली छोटी-छोटी घटनाओं, क्रियाओं एवं प्रतिकियाओं के प्रति एक अलग नज़रिया महसूस करना तथा लेखनी द्वारा दूसरों तक भी पहुंचाना है।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।