मुझे क्या पता,
ये दुनिया कैसी है?
कैसा इसका रंग है
कैसी इसकी सुन्दरता।
मुझे न पता,
मेरी मां कैसी है?
कैसा उसका रूप है,
कैसा उसका चेहरा।
पता है तो सिर्फ मुझे,
बस इतना है पता
प्यारी होगी उसकी सूरत,
जब इतनी प्या री है
उसकी मुझपर ममता।
मुझे क्या पता,
ये दुनिया कैसी है।
कैसा इसका रंग है
कैसी इसकी सुन्दरता।
मैं जन्मान्ध हूं,
बचपन से एक ही
रंग देखता आया हूं,
बस काला ही काला रंग
हर जगह पर पाया हूं॥
#नवल पाल
परिचय : नवल पाल की शिक्षा प्रभाकर सहित एम.ए.,बी.एड.है। आप हिन्दी,अंग्रेजी,उर्दू भाषा का ज्ञान रखते हैं। हरियाणा राज्य के जिला झज्जर में आप बसे हुए हैं। श्री पाल की प्रकाशित पुस्तकों में मुख्य रुप से यादें (काव्य संग्रह),उजला सवेरा (काव्य संग्रह),नारी की व्यथा (काव्य संग्रह),कुमुदिनी और वतन की ओर वापसी (दोनों कहानी संग्रह)आदि है। साथ ही ऑनलाईन पुस्तकें (हिन्दी का छायावादी युगीन काव्य,गौतम की कथा आदि)भी प्रक्रिया में हैं। कई भारतीय समाचार पत्रों के साथ ही विदेशी पत्रिकाओं में भी आपकी रचनाएँ प्रकाशित हैं। सम्मान व पुरस्कार के रुप में प्रज्ञा साहित्य मंच( रोहतक),हिन्दी अकादमी(दिल्ली) तथा अन्य मंचों द्वारा भी आप सम्मानित हुए हैं।
Wed Oct 4 , 2017
साथ निभाना, दिल मत जलाना न आजमाना। एक किताब, महकता गुलाब सजाए ख्वाब। कैसी महक, फैली दूर तलक जैसे फलक। नेक विचार, सुधरता आचार सुखी संसार। संत सत्कार, हो सपने साकार खुशी अपार। बूढ़े लाचार, नित करे पुकार मत दुत्कार। भ्रम जलते, हृदय से मिलते फूल खिलते। […]