भारत : अतीत, वर्तमान और भविष्य

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लेखक : श्री सुरेश जी सोनी

लेखक संघ के प्रचारक रहे है, उन्होंने अपनी इस छोटी सी पुस्तक में भारत के संतों के आविष्कार, भारत के दर्शन, भारत की अतीत में विश्व गुरु की भूमिका को अच्छे ढंग से प्रस्तुत किया। भारत पर हुए आक्रमण व आक्रमण के बाद जनता के दृष्टिकोण की भी विस्तृत व्याख्या की है। जिसमें यह दर्शाया गया कि हमने भृमित होकर भारतीय शोध, ग्रन्थ व वैज्ञानिकों के आविष्कारों को महत्व न देकर पश्चिमी वैज्ञानिकों की नकल पर भरोसा किया। भारत का दर्शन कला, साहित्य, भौतिकी, गणित, अर्थशास्त्र, जंतु विज्ञान, खगोलशास्त्र, चिकित्सा, संगीत, भाषा, राजनीति, युद्ध कला, विमान शास्त्र, औषध विज्ञान आदि में सर्वश्रेष्ठ था। परन्तु अंग्रेजो द्वारा वेद, शास्त्र, उपनिषद, ग्रन्थों के विषय मे फैलाये गए भ्रम के कारण हमने आजतक उनका अध्ययन, शोध नही किया। जिनकी नकल करके पश्चिमी जगत आज इतनी आगे बढ़ गया। आज भी देश का युवा भारतीयता पर गर्व न करके विदेशी सामग्री, शोध को ही उच्च मानता है क्योंकि पश्चिमी शिक्षा पद्धति ने कभी भारत की व्यापकता, विराटता और दर्शन को युवाओं को समझने ही नही दिया। इस पुस्तक को पढ़कर आप अवश्य भारत को जानने के लिए उत्सुक होंगे।

मंगलेश सोनी
मनावर(मध्यप्रदेश)

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।