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एहसास की अभिलाषा
Tue Oct 3 , 2017
तुम पुष्प से सुकुमार हो,तलवार की भी धार हो। तुम ही भविष्य हो देश का,मझधार में पतवार हो॥ माँ भारती को मान दो,और बड़ों को सम्मान दो। जो दुष्टता करते यहाँ,उन दुष्टों को अपमान दो॥ कर्तव्य पथ पर बढ़ चलो,और जीत सिर पर मढ़ चलो। जो सतजनों को सताता हो,दुष्टों […]

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सब रूपन मा तुम्ही गोसाईं
