एहसास की अभिलाषा

ajay ahsas
तुम पुष्प से सुकुमार हो,तलवार की भी धार हो।
तुम ही भविष्य हो देश का,मझधार में पतवार हो॥
माँ भारती को मान दो,और बड़ों  को सम्मान दो।
जो दुष्टता करते यहाँ,उन दुष्टों को अपमान दो॥
कर्तव्य पथ पर बढ़ चलो,और जीत सिर पर मढ़ चलो।
जो सतजनों को सताता हो,दुष्टों से जंग भी लड़ चलो॥
अपनी कहो सबकी सुनो,जो ठीक हो तुम वो चुनो।
ब्रह्मांड में बस प्रेम हो,तुम धागे कुछ ऐसे बुनो॥
तुम हो भविष्य देश के,उस ईशरुपी वेश के।
ममता दया करुणा यहाँ,निर्माण हो परिवेश के॥
जिस तरफ हो तेरी नजर,दुनिया चले बस उस डगर।
तू दांत गिनता सिंह के,क्या करेगा तेरा मगर॥
तेरे आगे सारा जग झुके,तू चाहे तो दुनिया रुके।
वो वीर भी धरती गिरे,तू मार दे जिसको मुक्के॥
तू वीर बन बलवान बन,तू भारत मां की शान बन।
तू शिक्षा-दीक्षा दे जहाँ को,तू ज्ञान की भी खान बन॥
स्वार्थ तज बन स्वाभिमानी,परमार्थ कर बन आत्मज्ञानी।
जो भी लिखे इतिहास को,वो गाए तेरी ही कहानी॥
तू लड़ जा अत्याचार से,और रिश्तों के व्यापार से।
यदि बात न बने बात से,समझा उन्हें तलवार से॥
शेखर,सुभाष,अशफाक बन,तू वतन खातिर खाक बन।
गीता,कुरान,गुरु ग्रन्थ साहिब,इन सभी जैसा पाक बन॥
तू विवेकानन्द,तू बुद्ध बन,और अधर्म के तू विरुद्ध बन।
गंगा की निर्मल धार-सा,तू मन से अपने शुद्ध बन॥
तू गगन,उपवन,सुमन,तू भोर की पहली किरन।
‘एहसास’ की अभिलाषा ये,तू कर अमन अपने वतन॥

                                                                 #अजय एहसास

परिचय : देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के सुलेमपुर परसावां (जिला आम्बेडकर नगर) में अजय एहसास रहते हैं। आपका कार्यस्थल आम्बेडकर नगर ही है। निजी विद्यालय में शिक्षण कार्य के साथ हिन्दी भाषा के विकास एवं हिन्दी साहित्य के प्रति आप समर्पित हैं।

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