नियति

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pratibha
देखो जरा हथेली अपनी,
उसमें हल्की-सी
लकीर हमारी भी…॥
मत होना परेशान कभी,
मेरी किस्मत की लकीरों में
नाम तुम्हारा शामिल है…॥
देखो जरा हथेली अपनी,
उसमें बसी तकदीर हमारी।
मिलना-बिछड़ना खोना-पाना,
यह खेल बेशक नियति का
इसी नियति में चुना तुझको,
देखो मेरी किस्मत में॥
कितनी भी हम कोशिश कर लें,
जिंदगी के आशियाने में
पर नियति के हर फैसले को,
स्वीकार करना पड़ता है॥
इसी नियति ने चुना,
तुझको मेरी किस्मत में।
                                                   #प्रतिभा श्रीवास्तव ‘अंश
परिचय : प्रतिभा श्रीवास्तव `अंश` मध्यप्रदेश के भोपाल में रहती हैंl लेखन आपकी पसंद का कार्य हैl जन्म तारीख १ मार्च १९८० और जन्म स्थान-छपरा (बिहार) हैl शिक्षा-एम.ए.(हिन्दी) तथा पीजीडीसीए हैl आप मध्यप्रदेश लेखिका संघ की सदस्या हैंl विभिन पत्र-पत्रिकाओं में कविता व लेख का नियमित प्रकाशन जारी हैl उपलब्धि यही है कि,शब्द शक्ति सम्मान और हिन्दीसेवी सम्मान २०१६ से सम्मानित हैंl आपकी लेखन सक्रियता में आत्मकथ्य,आकाशवाणी पर बाल कविता का प्रसारण और विभिन्य जगहों पर काव्य पाठ करना शामिल हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।