देखो जरा हथेली अपनी,
उसमें हल्की-सी
लकीर हमारी भी…॥
मत होना परेशान कभी,
मेरी किस्मत की लकीरों में
नाम तुम्हारा शामिल है…॥
देखो जरा हथेली अपनी,
उसमें बसी तकदीर हमारी।
मिलना-बिछड़ना खोना-पाना,
यह खेल बेशक नियति का
इसी नियति में चुना तुझको,
देखो मेरी किस्मत में॥
कितनी भी हम कोशिश कर लें,
जिंदगी के आशियाने में
पर नियति के हर फैसले को,
स्वीकार करना पड़ता है॥
इसी नियति ने चुना,
तुझको मेरी किस्मत में।
#प्रतिभा श्रीवास्तव ‘अंश‘
परिचय : प्रतिभा श्रीवास्तव `अंश` मध्यप्रदेश के भोपाल में रहती हैंl लेखन आपकी पसंद का कार्य हैl जन्म तारीख १ मार्च १९८० और जन्म स्थान-छपरा (बिहार) हैl शिक्षा-एम.ए.(हिन्दी) तथा पीजीडीसीए हैl आप मध्यप्रदेश लेखिका संघ की सदस्या हैंl विभिन पत्र-पत्रिकाओं में कविता व लेख का नियमित प्रकाशन जारी हैl उपलब्धि यही है कि,शब्द शक्ति सम्मान और हिन्दीसेवी सम्मान २०१६ से सम्मानित हैंl आपकी लेखन सक्रियता में आत्मकथ्य,आकाशवाणी पर बाल कविता का प्रसारण और विभिन्य जगहों पर काव्य पाठ करना शामिल हैl
Tue Oct 3 , 2017
अपलक-सी देख रही थी, और अंतस मन में महसूस कर रह थी वो, अनछुए स्पर्श को। अनजानी-सी सिहरन, रोम-रोम में घुलती जा रही थी,फिजा में फैली वो मादक गंध, मदहोश किए जा रही थी। दूधिया चांदनी में ओस से, भीगी सरसराती हवा में साड़ी के पल्लू को थामे, उन अजनबी […]