एक प्रार्थना…

manju sharan
माँ…
इतनी भक्ति देना कि,विश्वास आप पर हर पल बना रहे,
इतनी शक्ति देना कि,हर संकट से मुकाबले को तैयार रहें
इतना ज्ञान देना कि,अंधेरों में राहों को ढूंढ पाएं,
इतना साहस देना कि,चुनौतियों को भी चुनौती दे पाएं…l

माँ…
इतनी श्रद्धा देना कि,श्रद्धेय को पहचान लें,
इतनी करुणा देना कि,आँखों की नमी को जान लें
इतनी ममता देना कि,हर बचपन पर,
दुलार और प्यार लुटा सकें,
इतनी समता देना कि,हर भेदभाव से ऊपर उठकर
मानवीय गुणों को आत्मसात कर सकें…l

माँ…
जानती हूँ ये जीवन आपके चरणों से शुरू हुआ,
मानती हूं आपके चरणों  में ही मुक्ति भी है
पर,जीवन के मर्म समझ लूँ,इतना तो समय देना,
कुछ कर्ज़ चुका लूँ,इतना तो करम करना,
कुछ रिश्तों को बचा लूँ और कुछ बना लूँ
माँ…इतना तो सबर देना…ll
                                                                  #मंजू शरण

परिचय‬: मंजू शरण की जन्मतिथि-२३ दिसंबर १९७९ और जन्म स्थान-समस्तीपुर(बिहार) हैl आपकी शिक्षा-एम.एस-सी. और बी.एड. है तथा कार्यक्षेत्र में शिक्षिका हैंl निवास का वर्तमान और स्थाई शहर-धनबाद(राज्य-झारखंड) ही हैl सामाजिक क्षेत्र-गतिविधि में आप महिला सशक्तिकरण तथा शिक्षा के क्षेत्र में सेवारत हैंl लेखन में आपकी विधा-श्रृंगार रस और समसामयिक लेखन हैl दैनिक पत्र-पत्रिकाओं में कहानियों और आपकी कविताओं का भी प्रकाशन हुआ हैl आपको दैनिक पत्र से `अपराजिता सम्मान` तथा `नेशन बिल्डर` सम्मान आदि दिए गए हैंl लेखन के क्षेत्र में आप साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हुई हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-जनमानस में नई  सोच को दिशा देना तथा हिंदी के प्रति रुचि जगाना हैl 

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।