एक प्यारी बच्ची,जिसकी माँ नहीं है वो रात को छत पर अकेले बैठे-बैठे चंदा मामा से कहती है…
चंदा मामा तुम आ जाओ,
नींद न आती लोरी गाओ॥
बिन माँ आँचल जीवन सूना,
चाहूँ माँ का प्रेम ही छूना॥
चंदा मामा तुम बतलाओ,
प्रभु क्यों पाषाण मन बताओ॥
इनकी माँ को यम ले जाते,
बिन माँ के क्या ये रह पाते॥
ले लो मेरी गुड़िया सारी,
कुर्ती जो मुझे सबसे प्यारी॥
बदले मेरी माँ लौटा दो,
चेहरे पे तुम ख़ुशी ला दो॥
कैसे मामा हो तुम मेरे,
तोड़े हो तुम ख्वाब सुनहरे॥
खुद को तुम भगवान कहाते,
फिर मेरी ख़ुशी क्यों न लाते॥
हाथ जोडू करुं मैं विनती,
याद करुं मैं पूरी गिनती॥
अब न कोई मांगूं खिलौना,
चाहूँ माँ का आँचल कोना॥
#अवनेश चौहान ‘कबीर’
परिचय: अवनेश चौहान ‘कबीर’ की जन्मतिथि-१ जुलाई १९८५ और जन्म स्थान-चन्दौसी है। आप उत्तर प्रदेश राज्य के शहर-चन्दौसी(जिला-संभल) निवासरत हैं। स्नातक तक शिक्षित श्री चौहान का कार्यक्षेत्र-वित्त है। आप अधिकतर दोहे रचते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-आत्मिक संतुष्टि है।
Thu Sep 7 , 2017
यारों आपकी दुआओं में हमें याद किया करो। नियति सुख में भूल, गमों में याद किया करो॥ अक्सर जब गम-ए-लम्हें नागिन बनके डंसते हैं। कुछ न सोचो, न डरो,जरा मदिरा पिया करो॥ यार छूटे, प्यार टूटे, दिल के टुकड़े हो जाए। डरना न कभी, काम हिम्मत से लिया करो॥ जीना […]