बदलता वक्त हूँ, जाने मेरा अंजाम क्या होगा,
सुनाई दे रहे नामों में मेरा नाम क्या होगा ?
यहां बिकती सभी चीजें हैं जिनका मोल लाखों में,
बना अनमोल फिरता हूँ तो मेरा दाम क्या होगा ?
निकल पड़ता हूँ, नदियों में समंदर भी मिले तो क्या,
अभी जो है ये नजराना मेरा ईनाम क्या होगा ??
लगा रखा है तेरा नाम अपने नाम के संग में,
हुआ रोशन जमाने में, तो अब बदनाम क्या होगा ?
हुई नेमत जो शिव की तो,मिली है रोशनी हमको,
नहीं अब सोचना कुछ भी मेरा परिणाम क्या होगा।
#सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’
परिचय: सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’ की जन्मतिथि-१९ जुलाई १९८५ और जन्म स्थान कानपुर है। आपका शहर-कानपुर, बनारस(राज्य-उत्तरप्रदेश) है। शिक्षा-बी. टेक.(सिविल) सहित एमबीए (योजना प्रबंधन) है। अभियांत्रिकी कार्यक्षेत्र अपनाते हुए भी आप गीत,ग़ज़ल,छन्द, मुक्तक,हास्य और व्यंग्य लेखन करते हैं।ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। बतौर प्रकाशन आपकी रचनाएँ कुछ पत्रिकाओं में हैं। आप एक भारतीय होने से बड़ा कोई सम्मान नहीं मानते हैं। पिडिट्स’ संस्था से जुड़कर समाजसेवा भी करते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज में एकता-अखंडता का संदेश देना,साथ ही आज के दौर में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना तथा समाज की बुराईयों को उजागर करना है।