बदलता वक्त हूँ

sourabh dikshit
बदलता वक्त हूँ, जाने मेरा अंजाम क्या होगा,
सुनाई दे रहे नामों में मेरा नाम क्या होगा ?
यहां बिकती सभी चीजें हैं जिनका मोल लाखों में,
बना अनमोल फिरता हूँ तो मेरा दाम क्या होगा ?
निकल पड़ता हूँ, नदियों में समंदर भी मिले तो क्या,
अभी जो है ये नजराना मेरा ईनाम क्या होगा ??
लगा रखा है तेरा नाम अपने नाम के संग में,
हुआ रोशन जमाने में, तो अब बदनाम क्या होगा ?
हुई नेमत जो शिव की तो,मिली है रोशनी हमको,
नहीं अब सोचना कुछ भी मेरा परिणाम क्या होगा।
                                                                #सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’ 
परिचय: सौरभ दीक्षित ‘पिडिट्स’ की जन्मतिथि-१९ जुलाई १९८५ और जन्म स्थान कानपुर है। आपका शहर-कानपुर, बनारस(राज्य-उत्तरप्रदेश) है। शिक्षा-बी. टेक.(सिविल) सहित एमबीए (योजना प्रबंधन) है। अभियांत्रिकी कार्यक्षेत्र अपनाते हुए भी आप गीत,ग़ज़ल,छन्द, मुक्तक,हास्य और व्यंग्य लेखन करते हैं।ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। बतौर प्रकाशन आपकी रचनाएँ कुछ पत्रिकाओं में हैं। आप एक भारतीय होने से बड़ा कोई सम्मान नहीं मानते हैं। पिडिट्स’ संस्था से जुड़कर समाजसेवा भी करते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-समाज में एकता-अखंडता का संदेश देना,साथ ही आज के दौर में लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना तथा समाज की बुराईयों को उजागर करना है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।