भारतवर्ष प्यारा

aalok vashishth
जहाँ है गंगा की उर्मिल धारा,
जहाँ ध्रुव कोई बन जाए तारा
जहाँ शून्य है जन्मा,
जिसे जाने जहां सारा
जिसके भाल पर शोभित पर्वतराज है न्यारा,
जहाँ है स्वयं गिरधर ने कोमल पांव पखारा
जिसके ओज से यहाँ औरंगजेब है हारा,
जहाँ पाकर ज्ञान की अमृत बना ‘कवि’ कालिदास बेचारा
जिसके ज्ञान ने यहाँ नन्द वंश संहारा,
वो देश है मेरा भारतवर्ष प्यारा।
जहाँ नचिकेता यमराज से आत्मज्ञान ले आता है,
जहाँ सावित्री के जप-तप से सत्यवान जी जाता है,
जहाँ बुद्ध की इक पुकार से अंगुलीमाल रुक जाता है,
जहाँ कनिष्ठा की निष्ठा में गोवर्धन झुक जाता है,
जहाँ शबरी के जूठे बेरों से संजीवनी उग आता है,
जहाँ देख सिल पर निशान एक वरदराज जग जाता है,
जहाँ अमित ज्ञान की अमिट स्रोत है;
जो विश्व गुरु कहलाता है,
वो भारतवर्ष है मेरा जिसपर मन मेरा मदमाता है।
जहाँ हैं जन्म लिए भगवान,जहाँ के बलशाली हनुमान
जहाँ भगवान करे स्नान,जहाँ की मर्यादा पहचान
जहाँ हैं हिय में बसते राम,जहाँ खेले कृष्ण-बलराम
जहाँ की अमन एक पैगाम,जहाँ बसतें हैं चारों धाम
जहाँ थे अभिमन्यु से वीर,जहाँ थे युधिष्ठिर से धीर
जहाँ थे अर्जुन के लक्षित तीर,जहाँ थे भीष्म से व्रती पीर
जहाँ की माटी उसकी इत्र,जहाँ थे कर्ण से अद्भुत मित्र
जहाँ बादल में बनते चित्र,जहाँ थे सुदामा से पाक चरित्र
जहाँ के पंछी गाते गीत,जहाँ शत्रु हो जाते मीत
जहाँ हारे को मिलती जीत,जहाँ सरहद न कोई भीत
जहाँ की शौर्य है उसकी शान,जहाँ स्नेह दिलाता मान
जहाँ सुख-दुःख एक समान,वो मेरा भारतवर्ष महान।
जहाँ के सारथी कृष्ण-मुरार,जहाँ दुर्गा के दस अवतार
जहाँ परशु सा दिव्य कुठार ,जहाँ प्रलय-गांडीव की टंकार
जहाँ का पुत्र श्रवण कुमार,जहाँ माँ काली पहने अरि-मुंडेरों की हार
जहाँ के मूल निवासी आर्य,जहाँ पूजा जाता हो कार्य,
जहाँ के अजेय द्रोण आचार्य,जहाँ के कुलगुरु कृपाचार्य
जहाँ शोणित वीरों का श्रृंगार,जहाँ सिंधु में उठता ज्वार
जहाँ हिमशिला रही हुंकार,जहाँ बारिश लाता मल्हार
जहाँ है वेदों का भंडार,जहाँ शास्त्रों का हो समाहार
जहाँ हो दीपों का त्योहार,जहाँ हो रंगों का बौछार
जहाँ पूजे जाते औजार,जहाँ के हरे खेत पतवार
जहाँ न भूखा न बीमार,है सबका भारत पालनहार।
परिचय- 
नाम-अलोक कुमार
साहित्यिक उपनाम-अलोक कुमार वशिष्ठ
वर्तमान पता-पकरीबरावां (एरुरी)
राज्य-बिहार
शहर-नवादा
शिक्षा-जारी 12वीं कक्षा में अध्ययनरत
विधा -आलेख/कविता
लेखन का उद्देश्य-सामाजिक बदलाव

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।