हिन्दी ही हिन्द

 sunil naman
भारतवर्ष में हिन्दी एक वरदान है,
हिन्दी ने बनाई विश्व में अपनी पहचान है।
हर अक्षर में हिन्दी अमृत घोलती,
भारत की जनता है जो हिन्दी बोलती।
शब्द-शब्द इसका प्राणवायु संस्कृति की फूंकता,
जग सारा हिन्दी के इर्द-गिर्द ही घूमता।
भारत के मस्तक की भाल है हिन्दी,
भारत की आन,बान और शान है हिन्दी।
हिन्दी, हिन्द की भाषा अनमोल,
कितने प्यारे इसके बोल।
हिन्दू,मुस्लिम,सिख,ईसाई,
हिन्दी सबमें ही समाई,
हिन्दी से न हमें कोई रूसवाई।
अलख स्वतंत्रता का हिन्दी ने जगाया,
अंग्रेजी सरकार को जिसने मातृभूमि से भगाया।
हिन्दी, जन-जन की भाषा है,
हिन्दी ही हिन्द की असली परिभाषा है।
वैज्ञानिकता में डूबी है,शब्दों का अतुल्य भंडार है,
हिन्दी में ही झलकती शालीनता,हिन्दी हमारा व्यवहार है।
अक्षय इसका शब्दकोश,सरल सहजता में डूबी हिन्दी,
अंग्रेजी के जो पल में लगा देती है बिन्दी।
हिन्दी ईश्वर की अनमोल देन, गंगाजल जैसी पवित्रता से आती हिन्द की खुशबू, हिन्दी तो भारत का इत्र है।
महादेवी, पंत, निराला और मुंशी प्रेमचंद हिन्दवी रत्न।
हिन्दी ने भारत की एकता,अखंडता के लिए सदा किए हैं प्रयत्न।
मीरा,तुलसी,कबीर, सूर और रसखान हिन्दी के रहे ताज,
हिन्दी का साहित्य अनूठा,करेगा विश्व पर सदा राज।
अनुपम हिन्दी का गौरव है,यूएनओ तक खिली इसकी कलियां है।
हिन्दी से महकती आज विश्व की गलियां है।
हिन्द देश हिन्दवी से आज महक रहा,
विश्व कोयल की सी मधुर भाषा के लिए आज तरस रहा।
हिन्दी वतन है,हिन्दी हमें प्यारी है,
हिन्दी भारतीयों की ही नहीं,पूरे जग की बन रही दुलारी है।
                                                                       #सुनील कुमार
परिचय :सुनील कुमार लेखन के क्षेत्र में धार्विक नमन नाम से जाने जाते हैं। आप वर्तमान में डिब्रूगढ़ (असम)में हैं,जबकि मूल निवास झुन्झुनूं (राजस्थान) है।  शैक्षणिक योग्यता एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य,समाज शास्त्र,)सहित एम.एड., एमफिल और बीजेएमसी भी है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।