मैं दीमक हूँ

kumari archana
हाँ में दीमक हूँ,
घर दिवारों पर
खिड़कियों पर,
किताबों में
पुरानी समानों पर
मिट्टी के अन्दर
अपना रैनबसरे बना लेती हूँ,
धीरे-धीरे फैलती जाती हूँ
जैसे बरगद की लताएं हों।
मैं कहीं भी जाऊँ,
अपना स्थान घेर लेती हूँ
या यूँ कहें एक सुरक्षित दायरा
बना लेती हूँ,
मैं स्त्री नहीं हूँ
जो आजीवन असुरक्षित रहती हो,
अपने अस्तित्व के लिए।
कोई मुझे जल्दी हिला-डुला नहीं सकता,
उस जगह
उस वस्तु को
उस इन्सान को
जकड़ लेती हूँ,
जब तक अग्नि की लपटों से
भस्म नहीं हो जाती हूँ,
या कृत्रिम प्रयोग से
मुझे नष्ट नहीं किया जाता।
मैं मृत पौधों को,लकड़ी,पत्ती,कूड़े,मिट्टी व जानवरों के गोबर के साथ में,
शक्की इन्सानों के
दिमाग को अपना निशाना बना
धीरे-धीरे उन्हें खोखला कर देती हूँ।
 मैं दिखती नहीं हूँ,
पर शंका का बीज के रूप में
हमेशा लोगों जेह़न में पलती हूँ।
कोई अपना घर खुद ही तोड़ लेता
तो कोई हिंसा पे उतारु होकर
हत्या तक कर बैठता,
तो कोई आंतकवादी ही बन जाता
तो कोई सम्प्रदायवाद की आग
देश में लगा एकता-अखण्डता को खंडित करता,
कोई अपने ही देश से गद्दारी कर
इमान तक बेच देता।
मैं दीमक तो नहीं हूँ,
न ही कभी किताबी कीड़ा रही
पर कागजी कीड़ा रही हूँ,
स्मृति कमजोर होने से
कागजों पर अभ्यास करती थी,
अब भी वही कर रही हूँ
अपनी कविताओं को लिखकर
कागज की कतरन-कतरन को
चुन-चुन कर खा जाती हूँ।
कलम की स्याही से काला कर देती हूँ
फिर मोतियों जैसी शक्ल में
सफेद-सफेद शब्द उकेर आते हैं
कविता बनकर।

                                                                             #कुमारी अर्चना

परिचय: कुमारी अर्चना वर्तमान में राजनीतिक शास्त्र में शोधार्थी है। साथ ही लेखन जारी है यानि विभिन्न पत्र- पत्रिकाओं में निरंतर लिखती हैं। आप बिहार के जिला हरिश्चन्द्रपुर(पूर्णियाँ) की निवासी हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।