ज़रा तुम मेरे पास आओ,
तुमसे मिलना चाहता हूँ।
तेरी सागर-सी आँखों में,
खुद को देखना चाहता हूँ॥
तेरे लबों की मदिरा में,
आज डूब जाना चाहता हूँ।
शराब पीकर बहका नहीं,
आज बहकना चाहता हूँ॥
तेरे आगोश में आकर,
तुझमें मिलना चाहता हूँ।
तुम मुझे खत लिख दो,
खुद को पढ़ना चाहता हूँ॥
तेरे शब्दों के जादू में,
खुद को देखना चाहता हूँ।
तुममें सब कुछ भूल गया हूँ,
मैं खुद से मिलना चाहता हूँ॥
तेरे ख्यालों के दर्पण में,
सजना-संवरना चाहता हूँ।
वो लिहाफ रोज बदलता था,
उनको रोज बदलना चाहता हूँ॥
बहुत लिख चुका साथी तुझे,
दिन-रात लिखते-लिखते।
आज खुद को कागज पर,
उतरते देखना चाहता हूँ॥
गुलाब जैसी रंगीन स्याही में,
मोहब्बत भारी कलम डुबोकर।
कैसे लिखते हैं किसी को,
वैसे ही लिखते देखना चाहता हूँ॥
किसी सुर के सुरीले अंदाज में,
ग़ज़ल,गीत,दोहा के जरिए।
तुम मुझे खत लिख दो,
खुद को गुनगुनाना चाहता हूँ॥
जैसे कल्पना में अंजुम लिखता हूँ,
वैसे ही आसमां बनाना चाहता हूँ।
तेरे ख्यालों के पंखों को ले,
उन्मुक्त गगन में ऊँची उड़ानें चाहता हूँ॥
शायरी बनकर तेरे इन लबों से,
मैं झलकना चाहता हूँ।
तेरे ख्यालों में,इस खत में,
मैं तेरा दूल्हा बनना चाहता हूँ॥
अनोखे अंदाज में साथिया,
तुमसे मिलना चाहता हूँ।
तुम अपने बालों को फैला दो,
मैं खोकर इनमें उलझना चाहता हूँ॥
बहुत अंधेरे में काटी है रातें,
बालों से छनकर आती चाँदनी में।
चाँद के साज पर गुनगुनाती चाँदनी से,
मिलकर बिखरना चाहता हूँ॥
तेरी ग़ज़लों में हवा का झोंका बन,
तेरी सांसों में समाना चाहता हूँ।
मेरे परवर दिगार मुझे हवा बना,
सांस बन काम आना चाहता हूँ॥
#ऋषभ तोमर(राधे)
परिचय : ऋषभ तोमर(राधे) मध्यप्रदेश के शहर अम्बाह (जिला मुरैना) में रहते हैंl इनकी आयु २० वर्ष है,और लिखने का शौक रखते हैंl