राखी

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rajlaxmi
     पांच भाइयों  की लाड़ली बहिन
है वह। माता-पिता के बाद भी सब
उसे घर बुलाते,प्यार से उपहार देते।
भाभियाँ भी श्रृंगार का पूरा सामान
देती। भतीजे और भतीजियाँ बुआ-
बुआ करते न थकते।
      अचानक सम्पत्ति  को लेकर मनमुटाव हो गया। छोटे भाई जो न्यायाधीश हैं,वो नाराज हो गए। घर नहीं आते पर,वह हर साल राखी भेजती रही।
      इस बीच स्मार्ट फोन पर उसने एक विदेशी से दोस्ती की। मना करने पर भी उसने एक उपहार भेजा। कस्टम विभाग से फोन आया कि,बीस हजार कस्टम डयुटी दो। वह बोली-मेरे पास पैसे नहीं है,नहीं लेना।
विदेशी मित्र ने डराया तो उसने
कहा-मेरे भैया न्यायाधीश हैं,परेशान किया तो उन्हें  बोलूंगी।
  रक्षा सूत्र का महत्व पता चला कि,धन नहीं,भाई जरूरी है। यानि राम से भी बड़ा राम का नाम है।
                                                        #डॉ.राजलक्ष्मी शिवहरे
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।