रहने दो

anju jindal
और मत सोचो,
क्या सोच-सोचकर
प्रेम किया करोगे…
इन चिड़ियों को
देखो,
दाना चुगते-चुगते भी
प्रेम में होती हैंl
उस पेड़ की हर
शाख से प्रेम है इनको,
जहाँ तिनका-तिनका जोड़
घोंसला बनाना
सीखा था इन्होंनेl
उन हवाओं से भी
प्रेम है इनको,
जिन्होंने
गिराए थे इनके पहले
आशियाने..
बस माँग ली थी
माफी,
और इनके परों को
आसमान की ओर उठा दिया था..
इतने भर से ही
विश्वस्त हैं ये
तुम भी भरोसा कर
लो..
भुला दो सारे
विषाद,
बिसरा दो सारे
वैरागl
तुम बाध्य नहीं हो,
बस एक बार
अपनी कर्मधूली
लगाकर देखो मस्तक पर,
जैसे चिड़िया
चोंच में भर लाती है
एक घूंट पानी..
बुझा लेती है
जन्मों की प्यासl
नहीं बाँचा
उसने किसी प्रेम पोथी
को,
कोई प्रेम
व्याकरण भी नहीं सीखाl
चिड़िया की नईं
फुनगियों पर
फुदक लेने से
और बारिश के
दिन
पेड़ का थोड़ा
झुक जाने भर से
प्रेम की
अभिव्यक्ति छू जाती है
दोनों के तन-मन कोl
तुम भी एक बार
जीवन-मृत्यु के,
इस अमृत तत्व को
चखकर तो देखो,
एक बार प्रेम
करके देखो
अपनी जन्मधूली से…ll
#अंजू जिंदल
परिचय : श्रीमती अंजू जिंदल का नाता पंजाब राज्य  भटिंडा से हैl आपकी शिक्षा बीएससी और बीएड हैl  आप बैंक कर्मचारी होकर लेखन में सक्रिय हैंl प्रकाशित साझा संकलन में-कुछ यूँ बोले अहसास,एहसास की दहलीज़ परऔर खनक आखन की आदि हैl

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मैं तिरंगा हूँ...

Mon Jul 31 , 2017
मैं मेरी माँ का अनमोल गहना, फौजी का अरमान तिरंगा हूँ। मैं तीन रंगों में विभाजित,लेकिन एकता का रंग तिरंगा हूँ …….॥ मैं वीरांगना का उजड़ा सुहाग, सोलह श्रृंगार तिरंगा हूँ। मैं देश का गौरव माँ का आँचल, वीरों का लिबास तिरंगा हूँ …..॥ धर्म-जाति से मेरा नहीं कोई वास्ता, […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।