बहन की भाई के लिए पुकार

durvesh
आ जाओ भैया याद आपकी बहुत रुलाती है मुझको,
भैया रक्षाबंधन पर राखी गुम-सुम करती है मुझको॥
माँ कहती थी ये भैया की रक्षा के लिए बांध दे इसको,
भैया क्या राखी का प्यार निभाना नहीं आया मुझको॥
आ जाओ भैया आँखों का पानी सूख गया गले लगाओ मुझको,
माँ का बुरा हाल है भैया आकर धीर बंधाओ उसको॥
होली गई,तीज गई ,सब त्यौहार चले जाते हैं,
एक आप नहीं आते,हम सब सूने रह जाते हैं॥
ये कैसी कसम कैसी ड्यूटी है भैया,अपने पराए हो जाते हैं,
अपनों को छोड़ अपने कातिलों को बचाने जाते है॥
बचपन की वो लड़ाई आज भी मुझे याद आती है,
भैया हर पल मुझे आपकी याद बहुत रुलाती है॥
कैसी ये देश भक्ति हो गई,बहना भी आज पराई हो गई,
जिसके लिए जान छिड़कता था,उसके लिए ड्यूटी जरूरी हो गई॥
भैया अब में कहाँ-किस घर किस शहर जाऊँगी,
आपके बिना अब भैया में भी मर जाऊँगी॥
‘आदित्य’ किससे कहेगी ये अपने दिल का हाल अब,
जीते जी अब ये घुटकर ही मर जाएगी॥
अगर हो यही हाल फ़ौज का,तो सभी से कह के जाएगी,
फ़ौज में भेजने से अच्छा भैया को घर में बैठा के सजाऊंगी॥
आदित्य बजरंगी (दुर्वेश चौधरी)
                                                                                       #बजआदित्यरंगी (दुर्वेश चौधरी)
परिचय: बजआदित्यरंगी (दुर्वेश चौधरी) उत्तरप्रदेश के बुलंद शहर जिले के डिबाई तहसील से हैं। आप चिकित्सा की पढ़ाई अलीगढ़ हॉस्पिटल से कर रहे हैं। उम्र 23 साल है। लिखना आपका शौक है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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