यूँ ही साथ चलते-चलते
एक दिन तुमने कहा..
रुको..!
पर मैं चलती रही..
तुमने कहा..
चलो..!
और मैं रुक गयी..
तुमने इसे अपनी अवहेलना समझा,
और तुम नाराज हो गए..
काश..! तुम समझ पाते
कि..
यह तिरस्कार नहीं था
तुम्हारे प्रति,
यह तो तुम्हारी नजर में
खुद की अहमियत,
खुद की इच्छा,
और खुद का वजूद,
साबित करने का
एक प्रयास था मेरा…
काश..! तुम समझ पाते..
बस तुमने एक बार
सिर्फ एक बार कहा होता
कि..
“जो तुम चाहो..”
फिर शायद..
शिकायत का मौका नहीं मिलता
कभी भी..
कहीं भी..
और
किसी को भी..
नाम- डॉ वन्दना गुप्ता
मध्यप्रदेश- उज्जैन
शिक्षा- एम. एस सी., एम. फिल., पी एच.डी. (गणित)
प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष
गणित विभाग
शासकीय कालिदास कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उज्जैन
रुचि- अध्यापन, लेखन एवं पाठन
प्रयास रहता है, पारिवारिक या सामाजिक विसंगतियों को कथा कहानी कविता के माध्यम से प्रसारित कर समाधान तलाशने का….
उपलब्धियां- गणित विषयान्तर्गत लगभग 50 शोधपत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के जर्नल्स में प्रकाशित, मेरे निर्देशन में कुछ शोधार्थी Ph. D. उपाधि प्राप्त, कुछ शोधरत।
शाजापुर महाविद्यालय में कार्यरत रहने के दौरान बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ जयंती समारोह में मध्यप्रदेश साहित्य परिषद द्वारा काव्यपाठ हेतु पुरस्कृत
पिट्सबर्ग से ऑनलाइन प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय द्वैभाषिक पत्रिका सेतु द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय काव्य प्रतियोगिता 2016 में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ है।
Sun Oct 7 , 2018
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