खुद का हत्यारा

0 0
Read Time1 Minute, 52 Second

gopal nirdosh

कई बार,
हमने मारा है खुद को
जब बचपन में
मेरा बड़ा भाई
अपने बड़प्पन की धौंस जमाकर
मेरी इच्छा के विरुद्ध
मुझसे काम करवाता था,
या फिर
मेरा छोटा भाई
माँ-पिता का सहारा ले
जिद कर,मुझसे-
मेरा हक भी छीन ले जाता थाl
स्कूल में,
उद्दंड लड़के
मेरी शराफतों का
नाजायज फायदा उठा
मेरी कोई प्यारी-सी चीज
मुझसे छीन लेते थेl
कॉलेज में,
मुझसे सम्पन्न घरों के
लड़के हड़प लेते थे
मेरी कुर्सी
मेरे नोट्स,
या फिर,
मेरी वो
जिसे मैं जान देने की हद तक
प्यार करता थाl
लेकिन,वो भी…
मुझ ‘निर्दोष’ को
अकेले छोड़कर
एक दिन उनके साथ
ये कहते हुए
चली गई, कि
अपना खयाल रखना…

                                                                                    डॉ.गोपाल प्रसाद’निर्दोष'

परिचय : डॉ.गोपाल प्रसाद रचनाकार के तौर पर`निर्दोष` नाम से पहचाने जाते हैं। आप बिहार के माल गोदाम( जिला नवादा) में रहते हैं। आपका जन्म १९७१ का है। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद एम.ए.,पी-एच.डी.,बी.एड. किया है।लेखन,अध्यापन,चित्रकर्म एवं रंगकर्म से भी जुड़े हुए हैं। आपकी कृति-जयनंदन:‘व्यक्तित्व एवं कृतित्व(आलोचना)` है,तो कुछ हिन्दी पत्रिकाओं केसंपादक भी हैं। रचनाएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं एवं संकलनों में प्रकाशित हैं।कहानियाँ,कविताएँ,गीत,ग़ज़ल,एकांकी,लेख,रिपोर्ताज,रेखाचित्र आदि आप रचते हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

बेबस आवाज

Sat Jul 1 , 2017
बेबस है एक आवाज, लोगों के जर्जर तहखाने में व्याकुल हो उठती है जब कभी कोई, शोर सुनाई देता है डरी हुई,थोड़ी सहमी-सी इन महानगरों के दोहरे आचरण से, जहाँ असत्य का आधिक्य है जहाँ सत्य का मुद्रा से विनिमय उसकी आँखों के सामने होता है, जहाँ हर रोज कोई […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।