खुद का हत्यारा

gopal nirdosh

कई बार,
हमने मारा है खुद को
जब बचपन में
मेरा बड़ा भाई
अपने बड़प्पन की धौंस जमाकर
मेरी इच्छा के विरुद्ध
मुझसे काम करवाता था,
या फिर
मेरा छोटा भाई
माँ-पिता का सहारा ले
जिद कर,मुझसे-
मेरा हक भी छीन ले जाता थाl
स्कूल में,
उद्दंड लड़के
मेरी शराफतों का
नाजायज फायदा उठा
मेरी कोई प्यारी-सी चीज
मुझसे छीन लेते थेl
कॉलेज में,
मुझसे सम्पन्न घरों के
लड़के हड़प लेते थे
मेरी कुर्सी
मेरे नोट्स,
या फिर,
मेरी वो
जिसे मैं जान देने की हद तक
प्यार करता थाl
लेकिन,वो भी…
मुझ ‘निर्दोष’ को
अकेले छोड़कर
एक दिन उनके साथ
ये कहते हुए
चली गई, कि
अपना खयाल रखना…

                                                                                    डॉ.गोपाल प्रसाद’निर्दोष'

परिचय : डॉ.गोपाल प्रसाद रचनाकार के तौर पर`निर्दोष` नाम से पहचाने जाते हैं। आप बिहार के माल गोदाम( जिला नवादा) में रहते हैं। आपका जन्म १९७१ का है। प्रारम्भिक शिक्षा के बाद एम.ए.,पी-एच.डी.,बी.एड. किया है।लेखन,अध्यापन,चित्रकर्म एवं रंगकर्म से भी जुड़े हुए हैं। आपकी कृति-जयनंदन:‘व्यक्तित्व एवं कृतित्व(आलोचना)` है,तो कुछ हिन्दी पत्रिकाओं केसंपादक भी हैं। रचनाएं अनेक पत्र-पत्रिकाओं एवं संकलनों में प्रकाशित हैं।कहानियाँ,कविताएँ,गीत,ग़ज़ल,एकांकी,लेख,रिपोर्ताज,रेखाचित्र आदि आप रचते हैं।

matruadmin

Next Post

बेबस आवाज

Sat Jul 1 , 2017
बेबस है एक आवाज, लोगों के जर्जर तहखाने में व्याकुल हो उठती है जब कभी कोई, शोर सुनाई देता है डरी हुई,थोड़ी सहमी-सी इन महानगरों के दोहरे आचरण से, जहाँ असत्य का आधिक्य है जहाँ सत्य का मुद्रा से विनिमय उसकी आँखों के सामने होता है, जहाँ हर रोज कोई […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।