गणतंत्र दिवस विशेष- जनतंत्र है स्वदेश

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गणतंत्र दिवस देश का,
जनतंत्र है स्वदेश का।
संविधान लिखा गया,
लागू फिर किया गया।

पवित्र पर्व है यही,
पवित्र धर्म है यही।
सुविज्ञ राष्ट्र है यही,
ये राष्ट्र है सर्वोपरि।

उचित लोकतंत्र है,
शुचि पर्व गणतंत्र है।
पर्व ये अशेष है,
ये राष्ट्र ही विशेष है।

सब एकसूत्र में बँधे,
न भेदभाव में फँसे।
हर एक फूल-सा खिले,
सब देश के लिए जिएँ।

गणतंत्र का महत्त्व है,
जनतंत्र का महत्त्व है।
दुर्भावना न हो कभी,
सद्भावना में हों सभी।

न कर्मभ्रष्ट हो कोई,
न धर्मभ्रष्ट हो कोई।
माँ भारती का मान हो,
राष्ट्र का जयगान हो।

#विनय अन्थवाल
देहरादून उत्तराखण्ड

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।