गणतंत्र दिवस विशेष- भारत गणतंत्र हमारा

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हर हृदय में बहती रहती
नित प्रेम की निर्मल धारा,
है विश्व कुटुंब में सर्वोपरि
भारत गणतंत्र हमारा,
ये जननी जन्मभूमि अपनी
है स्वाभिमान हमारा,
जहाँ सर्वधर्म समभाव रहा
सदा मानवता धर्म हमारा,
हो विकट परिस्थिति कितनी भी
हो विषम समय की धारा,
है वतन पर अपने मिटने का
स्वर्णिम इतिहास हमारा,
जहाँ गंगा, जमुना और सरस्वती
नदियाँ ही नहीं, सभ्यता हैं,
और विश्व में भाईचारा है
पावन संकल्प हमारा,
जहाँ लहर-लहर लहराता है
हर ओर तिरंगा प्यारा,
है देश हमारा विश्वगुरु
हम सबकी आँख का तारा…..

#कीर्ति श्रीवास्तव
गोमती नगर, लखनऊ

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गणतंत्र दिवस विशेष- विश्वनायक गणतंत्र

Mon Jan 23 , 2023
सन् उन्नीस सौ पचास में गणतंत्र जन्मा सतत् यह ऊँगली थामे नेताओं की चलता संसदों की गुँजारों से बनता बढ़ता रहता अच्छा लगता न्यारा सारा संविधान हमारा अख़बारों की कुख़बरों से मन उचट जाता आती तेरी याद बहुत सारी भारत माता एक ही बात निकलती दिल जब भर आता संविधान […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।