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वो गुज़रा ज़माना
Sat Jun 10 , 2017
वो गुजरा हुआ कल,वह ज़माना नहीं रहा। वो पहले वाला बचपन, वह याराना नहीं रहा॥ जिनमे थे,गुड्डे गुड़ियों के खेल। प्यारी दादी का,अब वह तराना नहीं रहा॥ खेले थे जिनमें,बचपन के सब खेल। वह बाग़ वे मैदान,वह ठिकाना नहीं रहा॥ देखा करते थे घंटों,ढलते सूरज को नदी का अब वह,किनारा […]

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