डॉ. अर्पण जैन शिक्षक अलंकरण से सम्मानित

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इन्दौर। हिन्दी प्रचार और विस्तार के लिए पहचाने जाने वाले हिन्दी योद्धा व पत्रकारिता के क्षेत्र में अध्यापन करवाने वाले डॉ. अर्पण जैन ’अविचल’ को रविवार जाल सभागार में बिज़नेस दर्पण द्वारा आयोजित शिक्षक अलंकरण समारोह में सम्मानित किया गया। मंचस्थ अतिथि देअविवि की कुलपति डॉ. रेणु जैन, इन्दौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी, धीरेंद्र कासलीवाल, हेमचंद्र जैन, मोयरा सरिया से संदीप जैन व बिज़नेस दर्पण के संपादक हेमंत जैन द्वारा श्री जैन को सम्मानित किया गया।

समारोह में जैन समाज के बीस से अधिक महनीय शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जो शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान दे रहे हैं।

डॉ. अर्पण जैन ने पत्रकारिता में ही अपना शोधकार्य किया है और विगत कई वर्षों से पत्रकारिता के विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ-साथ शोध कार्य करवा रहे हैं। मूलतः डॉ. अर्पण जैन ’अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं एवं पंद्रह वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रियता से कार्य कर रहे हैं, साथ ही, साहित्य ग्राम और ख़बर हलचल न्यूज़ के सम्पादक भी हैं।

श्री जैन को मिले सम्मान पर वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रघुवंशी, शैलेश पाठक, मुकेश तिवारी, संजय त्रिपाठी, मार्टिन पिंटो, गौरव साक्षी आदि ने शुभकामनाएँ देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।