डॉ. मिथिलेश दीक्षित व डॉ. सत्या सिंह भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित

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हिन्दी भाषा की सेवा के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान भाषा सारथी सम्मान से करता है सम्मानित

लखनऊ। हिन्दी भाषा के विस्तार के लिए कार्य करने व सारथी समान हिन्दी की सेवा करने वाले हिन्दी प्रेमियों को हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्यरत संस्थान ’मातृभाषा उन्नयन संस्थान’ द्वारा साहित्य भूषण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मिथिलेश दीक्षित व साहित्यकार डॉ. सत्या व्यास को सोमवार को लखनऊ में संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ एवं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी द्वारा भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित किया गया।
डॉ. दीक्षित वर्षों से साहित्य सेवा में संलग्न हैं, अब तक पचास से अधिक किताबें लिख चुकी हैं। हाइकु विधा में भी डॉ. मिथिलेश दीक्षित का योगदान अभूतपूर्व है।
डॉ. सत्या सिंह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रह चुकी हैं, इसके साथ वर्षों तक पुलिस विभाग में राजभाषा का कार्य भी संभालती रही हैं। हिन्दी के प्रति दोनों मनीषियों के अवदान को रेखांकित करते हुए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा लखनऊ में उन्हें भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित किया गया है।
इस अवसर पर मीरा मिश्रा, बिपिन मिश्रा, गोविंद तिवारी, इंद्रमोहन तिवारी, अरविंद तिवारी आदि मौजूद रहे।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।