प्रेम मंगल जी की तीन पुस्तकें विमोचित

0 0
Read Time1 Minute, 24 Second

संस्मय सम्मान से श्रीमती मंगल सम्मानित

इन्दौर। संस्मय प्रकाशन द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह में लेखिका प्रेम मंगल द्वारा लिखित संस्मय प्रकाशन द्वारा प्रकाशित तीन पुस्तक पैमाना(कहानी संग्रह), गर भूख न होती(काव्य संग्रह)और दीया मेरी भावना का(काव्य संग्रह) का विमोचन वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी के मुख्य आतिथ्य में व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य नितेश गुप्ता के करकमलों से संपन्न हुआ।


विमोचन उपरांत लेखिका प्रेम मंगल को ‘संस्मय सम्मान 2021’ से सम्मानित किया गया।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अर्पण जैन अविचल ने अपने वक्तव्य में लेखिका व परिवारजनों को अपनी शुभकामनायें दीं, साथ ही, लेखिका को निरंतर साहित्य साधना में रत रहने को प्रेरित किया। अंत में आभार विघ्नेश दवे ने माना।

matruadmin

Next Post

जो नहीं कहा गया उसको कहने का उपक्रम ही कहानी है-श्री सत्तन

Mon May 2 , 2022
नीहार गीते के कहानी संग्रह मेहंदी लिया मोतीझील से के विमोचन सम्पन्न इंदौर। ‘जो नहीं कहा गया, उसको कहने का उपक्रम है कहानी।साहित्यकार ने परकाया में प्रवेश कर लिखा।’ यह बात वरिष्ठ कवि एवं कुशल संचालक श्री सत्यनारायण सत्तन के हैं, जो उन्होंने वरिष्ठ कथाकार नीहार गीते के कहानी संग्रह […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।