अच्छा लगता है

1 0
Read Time1 Minute, 3 Second

तेरे ख़्यालों में रहना अच्छा लगता है ।
यादों के दरिया में बहना अच्छा लगता है ।।

तेरे​ दिल में सांसें लेना अच्छा लगता है ।
इंतज़ार के पल पल सहना अच्छा लगता है ।।

ख़ुशबू में तेरी महक़ना अच्छा लगता है ।
इश्क में तेरे बहकना अच्छा लगता है ।।

मेरे सताने पर चिढ़ जाना अच्छा लगता है ।
साथ पाकर यूं खिल जाना अच्छा लगता है ।।

बारिशों में साथ टहलना अच्छा लगता है ।
पल पल तेरे साथ निखरना अच्छा लगता है ।।

सर्द रातों में बिन तेरे सिसकना अच्छा लगता है ।
मेरे दिल में बस तेरा रहना अच्छा लगता है ।।

रेत पर नाम मिटाकर लिखना अच्छा लगता है ।
दुनिया से यूं प्यार छुपाना अच्छा लगता है ।।

तुमको पाकर यूं मुस्कुराना अच्छा लगता है ।
‘मैं’ से यूं ‘हम’बन जाना अच्छा लगता है ।।

डॉ वासिफ क़ाज़ी
इंदौर ( काज़ीकीक़लम )

matruadmin

Next Post

विधायक आकाश विजयवर्गीय ने गीत *सिर्फ़ शम्भू* का किया विमोचन

Thu Aug 5 , 2021
युवा धर्म से जुड़कर देश मज़बूत करता है- आकाश विजयवर्गीयइन्दौर। पवित्र श्रावण मास में शिव की आराधना में इन्दौर के कवि एवं गीतकार गौरव साक्षी ने सिर्फ़ शम्भू गीत लिखा। इसका विमोचन विधानसभा तीन के विधायक आकाश विजयवर्गीय ने किया, साथ में, विशेष अतिथि के रूप में संस्था शौर्य नमन […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।