श्रावण मास ने दस्तक दी
रिमझिम बरसते बादल से
हरियाली भी इठला रही
मदमस्त दमकते मेघो से
भक्तिभाव भी जाग उठा
बम बम भोले की गूँजो से
गंगा जल कांवड़ में भरकर
ओम नमः शिवाय गा रहे
परमात्मा शिव की याद में
वे शिवालयों तरफ जा रहे
नशा छोड़ो,विकार छोड़ो
यही भोले भंडारी चाहते है
हिंसा छोड़ अहिंसा अपनाओ
शिव, शांति ही तो चाहते है।
#श्रीगोपाल नारसन
परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव
Fri Jul 19 , 2019
करते है रक्षा अपनी और अपने लिए ही मरते हैं। अपनों के सुख-दुख के खातिर वो सीमा पर लड़ते हैं।। जान भले चले जाये लेकिन, आन-बान और शान रहे। मतलब नहीं दुनियादारी से ,जिंदा हिंदुस्तान रहे।। माँ-बेटी और पत्नी-बहन को छोड़ के ये चले आते है। देश की रक्षा के […]