तुम मेरा मौन हो….

1 0
Read Time1 Minute, 19 Second

कहना चाहते हो तुम कई सारे भेद
अपने मन के लेकर मेरा हाथ अपने हाथों में।
सुनाना चाहते हो अपने दिल की हर धड़कन में
मेरे नाम का जिक्र निशब्द होकरआलिंगन कर बांहों में।
बीते हुए पल की सुखद अनुभूतियों के सुखद स्पंदन को
महसूस करना चाहते हो संग मेरे हमराज बनकर।
जीना चाहते हो लम्हा- लम्हा स्वप्निल से संसार में
संग मेरे ,मेरे हमसफ़र बनकर।
पल-पल टकटकी सी लगाकर मेरे इंतजार में
आबाज देते हैं मुझे मेरे हमजुबा़ होकर कहीं से।
सुनते रहते हो मेरे मन का अंर्तद्वंद
मेरे मौन से संवादों का मेरे हमबदन होकर।
लेकिन जीवन की कशमकश में भूल जाते हो
कुछ कहना है मुझसे और जुदा कर लेते हो
कुछ पल यादों के साए से हमसाया बनाकर।
अब तुम ही बताओ साथी कैसे कह दूं की
मन के अंतर्द्वंद से अंतर्मन में उपजी हुई हर हिलोर का तुम मेरा मौंन हो जबकि मैं तो तुम्हारे मौंन में हूं ।

स्मिता जैन

matruadmin

Next Post

महामारी निवारण हेतु मिलने वाली राशि का होना चाहिए सोशल आडिट

Sun Jun 13 , 2021
कोरोना काल में जहां आम आवाम की मानवीय संवेदनायें चरम सीमा पर रहीं, वहीं अधिकांश स्थानों पर प्रशासनिक क्रियाकलापों पर प्रश्नचिंह अंकित होते रहे। सूचना के अधिकार से बाहर होने की बात कहकर जबाबदेही पर मुकरना, उत्तरदायी अधिकारिकों के लिए आम बात हो गई है। सरकारों ने जो सुविधायें और […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।