
मेरी मोहब्बत से जब ये,
तेरा दिल भर जाएगा।
तुझसे दूर होकर जब ये,
दिल आंसू बहाएगा।।
हर ज़र्रे में,हर लम्हें में,
तेरा अक्स नज़र आएगा।।
दूर रहकर फिर भी,
तेरा ख्याल आएगा।।
बैचेनी के लम्हों में बस,
नाम ए वफ़ा गुनगुनाऊंगा।।
मैं फिर भी तुमको चाहूंगा
मैं फिर भी तुमको चाहूंगा।।
#वासीफ काजी
परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,इसलिए लेखन में हुनरमंद हैं। साथ ही एमएससी और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।
Mon Jun 5 , 2017
दूसरों के गम मिले तो बाँटिए। नेकियों के बीज बोते जाइए।। क्यों अँधेरों में भटकते रात दिन। खोल के दिल रोशनी में जाइए।। लौट कर तीर-ए-ज़ुबाँ आता नहीं। जहर बातों में न अपनी डालिए।। ज़िंदगी खुद रंगों से भर जाएगी। इक दफा तो दिल लगा कर देखिए।। जिंदगी का है […]