कोरे कागज पर लिखे

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कोरे कागज पर लिखने को लोग।
अपनी कहानियां छोड़ जाते है।
तभी तो लेखक कुछ लिख पाते है।
और लोगो जिंदगी के मायने बताते है।।

प्यार मोहब्बत से,
जीना चाहता हूँ।
आपकी बाहों में,
झूलना चाहता हूँ।
जब से दिल,
तुमसे लगा है।
जिंदगी जीने का,
अर्थ समझ आया है।।

न उम्मीद होकर भी,
उम्मीद से जिया हूँ।
प्यार मोहब्बत के लिए,
हर दिन तरसा हूँ।
पर अपनी उम्मीदों,
पर कायम रहा हूँ।
तभी तो तेरा प्यार,
हमे मिल पाया है।।

टूट जाते है सपने तब,
जब आत्मविश्वास न हो।
देख कर हालात तब,
छोड़कर चले जाते है।
और बीच मझधार में,
अकेला छोड़ देते है।
और हमारी जिंदगी में,
अंधेरा कर देते है।।

और लेखक को कोरे कागज पर,
लिखने को छोड़ देते है।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।