
मैं यह शरीर नही हूं
मैं एक आत्मा हूं
पूरी तरह अशरीरी
एक ज्योतिबिन्दु
एक ऊर्जा मात्र
जो रहती है
इस शरीर की
भृकुटि में
मुझ आत्मा से ही
चलता है यह शरीर
पर समझता हूं
शरीर को ही सबकुछ
भूल जाता हूं
आत्मा नही रहेगी
तो देह हो जाएगी
निर्जीव एक मिट्टी
फिर यह अहंकार कैसा
स्वयं में मैपन कैसा
अहंकार छोड़ो
निरहंकारी बनो
शांत स्वरूप
सदाचारी बनो।
#श्रीगोपाल नारसन

