
फिर से तारी है सितम अपने वतन में देखूँ
इस वबा को तू मिटा दे,ये चमन में देखूँ
ढेर लाशों का बना रूह लरज़ जाती है
ज़िन्दगानी है फ़ना,मौत जिसे आती है
ख़ून के अश्क हैं ग़मगीन बयाँबानी है
फ़िक्र उसको है कहाँ जिसकी ये सुल्तानी है
वो निगहबान है लेकिन वो हयादार नहीं
जान लेवा है मगर वो तो वफ़ादार नहीं
मेरे अल्लाह सबा,की ये दुआ है सुन ले
ज़ालिमों को तू बना
नेक,सदा है सुन ले
असमा सबा ख़्वाज
लखीमपुर , खीरी यूपी

