परम पिता से प्रार्थना

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हे! परम पिता पूज्य परमात्मा,
इस कोरोना का कर दो खात्मा।

हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है,
शवो का काफी अंबार लगा हुआ है।
श्मशान में जगह कहीं नहीं है,
वहां पर भी लंबी लाइन लगी है।
कर दो प्रभु इन सबका खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।

अस्तपतालो मे लंबी लाइन लगी है,
आक्सीजन की वहां कमी बनी है।
तीमारदार मरीजों के लिए खड़े है।
अस्तपतालो के बाहर बोर्ड लगे पड़े है।
कर दो प्रभु आक्सीजन की कमी का खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

सारी दुनिया को तुझको पुकार रही,
रहम की भीख तुझसे हैं मांग रही।
ये सारी दुनिया अब लाचार हुई हैं,
बिन इलाज के ये सब बेकार हुई है।
कर दो प्रभु, इन सबका खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

ये कैसा दुखद समय आया है,
बेटा बाप के कंधो पर आया है।
मां बहिन बिलख कर रो रही हैं,
बेटे भाई से चिपट कर रो रही हैं।
कर दो प्रभु इस रोदन का खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

रोक लो प्रभु ,इन दुखो की बरसात को,
कर दो प्रभु,तुम सुखो की बरसात को।
दुखी लोगों को अमन चैन आने लगे,
फिर से तेरा वे गुणगान करने लगे।
कर दो प्रभु,इस महामारी का खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

चारो तरफ निराशा का माहौल है,
सभी लोगो का बहुत बुरा हाल है।
कुछ टी वी चैनल डर फैला रहे हैं,
दिखा दिखा कर लोगो को डरा रहे है।
कर दो प्रभु,इस डर का तुम खात्मा,
हे! परम पिता पूज्य परमात्मा।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।