नौकरी के नौ काम है,दसवां काम है हां जी का, करते रहो सारे काम,कोई काम नहीं ना जी का। नौकरी में नहीं हैं आजादी,ये काम है गुलामी का, सारे दिन हां हां करो,पूरे दिन ये काम सलामी का। नौकर के नौ हाथ होते,पूरा काम टांग तराजू का, एक हाथ से […]

कोरोना से अब लड़ना है, इसका मुंह काला करना है। दो गज की दूरी रखनी है, मुंह पर मास्क लगाना है। घर से नहीं अब निकलना, घर से ही काम करना है। कोरोना से अब लड़ना है, इसका मुंह काला करना है। किसी के घर नहीं जाना है, किसी को […]

आज मुर्दे भी मुख खोल रहे हैं, अपने मन की पीड़ा खोल रहे हैं। हुआ है उनके साथ बहुत अन्याय, सबकी वे अब पोल खोल रहे हैं।। मिली नहीं अस्तपतालो में जगह, आक्सीजन के लिए भटक रहे थे। हो रही थी दवाओं की काला बाजारी, दवाओ के लिए हम तड़फ […]

लौटा दे कोई बचपन अब हमारा, उसका एहसान सदा मानेंगे हम।। कागज की किश्ती बनाते थे हम, किश्ती बनाकर उसे तैराते थे हम। डूब जाती थी जब किश्ती हमारी, ताली बजाकर खूब हंसते थे हम।। गरजते थे जब बादल डरते थे हम, डरकर मां की गोद में छिपते थे हम। […]

अस्थियां प्रवाहित होती थी मुझमें, अब लाशे निरंतर बहती है मुझमें। और अब कितने पाप धोऊ सबके, ये गंगा मैया कह रही है हम सबको। जिस देश में पवित्र गंगा बहती है, अब पवित्र गंगा में लाशे बहती है। कैसा बुरा समय अब आ गया है, जब मुर्दों की बुरी […]

कभी न कभी तो वो सुबह आयेगी पनहारिन जब पनघट पर जायेगी पानी भरकर घड़े सिर पर लायेगी, गीत सहेलियों के संग वह गायेगी। खुल जाएंगे, बन्द मंदिर मस्जिद घंटे अजान की आवाजे आयेगी, लग जाएंगे लंगर सब गुरुद्वारों मे, जनता लंगर छक कर खायेगी।। खुल जाएंगे सब स्कूल कॉलेज, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।