बादशाह चुप है

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जीवन की चिंता किसे है
अभी तो कुंभ चल रहा है
यह भी सब जानते है ,
कही चुनाव चल रहा है
सवाल न उठाओ उनसे
वे अवसर के बादशाह हैं
उन पर फ़र्क नही पड़ता
कोरोना में कौन मर रहा है
मरने पर मोक्ष मिलेगा सबको
क्योंकि अभी कुंभ चल रहा है
उनकी तो संवेदना मर गई
तुम देखो, यह देश जल रहा है
कौन हैं ये जो बोलते है सच
इस समय तो झूठ चल रहा है
मौत पर यूं सवाल न उठाओ
बादशाह चुप है देश बदल रहा है।
#श्रीगोपाल नारसन

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matruadmin

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मुझे फक्र है तुम साथी हो

Sat Apr 17 , 2021
अपनी ज़िद में अड़े मिलना हो मुसीबत तो खड़े मिलना मुझे फक्र है तुम साथी हो दिल के भी तुम बड़े मिलना पोछोगे मेरे गिरते आँसू को इरादों से तुम कड़े मिलना नहीं खून के रिश्ते माना कि मगर इंसानियत में बड़े मिलना -किशोर छिपेश्वर”सागर” बालाघाट Post Views: 26

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।