(विश्व पर्यावरण दिवस पर)
प्रकृति के खेल को कौन समझ पाया है,
आनन्द तो सभी लेते,रक्षा कौन कर पाता है।
उत्तराखंड के प्रहर ने कितनों को रुलाया है,
पहाड़,जंगल काटकर रास्ता सभी ने बनाया है।
बंद करो प्रकृति की सुंदरता को मिटाना,
मिलकर सभी को यही कसम है खाना।
प्रकृति में मनोरंजन कर स्वस्थ,सुरक्षित रहते हो,
फिर भी निर्दयी बनकर मुझे काटते रहते हो।
स्वास्थ,शांति,उपहास सभी का आनंद उठाते हो,
चंद रुपयों के लिए मेरे जंगलों को काटते हो।
दुःख मुझे भी है उनका, जो इस विपदा का शिकार हुए,
पर इसके जिम्मेदार भी वे खुद ही हुए।
वादा तुम करो मुझसे, छेड़-छाड़ नहीं करोगे,
तभी तुम प्रकृति और पवित्र धाम के दर्शन करोगे॥
#प्रेरणा सेंद्रे
परिचय: प्रेरणा सेंद्रे इन्दौर में रहती हैं। आपकी शिक्षा एमएससी और बीएड(उ.प्र.) है। साथ ही योग का कोर्स(म.प्र.) भी किया है। आप शौकियाना लेखन करती हैं। लेखन के लिए भोपाल में सम्मानित हो चुकी हैं। वर्तमान में योग शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।