डॉ मसानिया के नाम 6 नवाचार रिकॉर्ड दर्ज

0 0
Read Time1 Minute, 5 Second

देश की प्रसिद्ध रिकार्ड पत्रिका ‘ महाराष्ट्र बुक ऑफ रिकार्ड्स ‘ में शा उत्कृष्ट उ मा वि आगर के शिक्षक डाॅ दशरथ मसानिया के नाम शैक्षणिक नवाचार के 6 रिकार्ड दर्ज किये गये है। इस उपलब्धि पर पत्रिका ने इन्हें विक्रम अवार्ड से सम्मानित किया है। जो ISSN no.23490446 पृष्ठ क्रं 32-33 पर अंकित है।

1 .मालवी की पहली बार 1000 लोकोक्तियां – 2005
2 .अंग्रेजी की समान ध्वनि पर आधारित 1000 शब्दो का बाल शब्दकोष -2006

  1. संस्कृत व्याकरण सार एक चौथाई कागज पर – 2009
  2. गणित गायन के 68 दोहे –2018
    5 . हिन्दी भाषा शिक्षण मात्र 220 दोहों में -2019
    6 . एक वर्ष लाकडाउन मे 55 चालिसाओं का प्रकाशन -अप्रेल 2020 से मार्च 2021 तक

matruadmin

Next Post

वक्त

Sun Apr 11 , 2021
वक्त कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला, मिट्टी के घरोंदे के बंटवारे की लड़ाई में कब घर को बांट लिया पता ही नहीं चला, पगडंडी पर चलते चलते न जाने कब छः लेन सड़क पर पहुंच गए पता ही नहीं चला दादा के कंधे पर चढ़ हटखेलियां करते करते […]

पसंदीदा साहित्य

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।