वक्त

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वक्त कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला,
मिट्टी के घरोंदे के बंटवारे की लड़ाई में कब घर को बांट लिया पता ही नहीं चला,
पगडंडी पर चलते चलते न जाने कब
छः लेन सड़क पर पहुंच गए पता ही नहीं चला
दादा के कंधे पर चढ़ हटखेलियां करते करते
कब पोते पोतियों को कंधे पर लेकर आगे बढ़ गए पता ही नहीं चला
भाई बहनों के साथ खाट पर सोने के झगड़े में न जाने कब
बैड पर अकेले करवटें लेने लगे पता ही नहीं चला
मां बापू की सेवा करने में इतना मशगूल रहा
न जाने कब मैं वृद्ध एकांत वास पहुंच गए पता ही नहीं चला
इक्की,दूग्गी,पंजी को पाने की चाहत में
करोड़ों पा कर कब अरबों बटोर लिए पता ही नहीं चला
ये सब करते करते
वक्त कैसे गुजर गया पता ही नहीं चला

शुभकरण गौड़
हिसार (हरियाणा)

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कोरोना

Sun Apr 11 , 2021
चुनाव के समय नही कुंभ के समय आता है कोरोना नेताओं को नही श्रद्धालुओं को डराता है कोरोना कुंभ के लिए निगेटिव होना जरूरी है पोजेटिव को ही खाता है कोरोना दिन में कही घूमो नही मिलता कोरोना रात में कर्फ़्यू लगाया ताकि न आए कोरोना।#श्रीगोपाल नारसन Post Views: 46

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।