मोहब्बत के लिए…

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गीत कविता लेख आदि
मोहब्बत पर लिखता रहा।
और लोगों की हंसी का
पात्र मैं बनता रहा।
क्योंकि वो लोग हमें
पागल जो समझते थे?
इसलिए मेरी लेखनी
पर वो हमेशा हँसते थे।
पर जब मेरे मोहब्बत के
एक छोटे से पैग़ाम ने।
लोगों को मोहब्बत करना
और निभाना सिखा दिया।
लोगों में मोहब्बत का नशा
उस पैगाम ने भर दिया।
और हँसने वालो के मुँह पर
एकदम ताला लगा दिया।।

अब तो मुँह छुपाते फिरते हैं
और रातके अंधेरे में निकाले हैं।
क्योंकि मोहब्बत से जो
उन्होंने दुश्मनी कर ली हैं।
तभी तो मोहब्बत के लिए
यहाँ वहाँ रातको भटकते हैं।
पर कम्बख्त मोहब्बत भी
अब उन्हें पसंद नहीं करती।
इसलिए तो कुँवारेपन के
55 वर्ष पूरे कर गये हैं।
पर दिल आज भी उनका
बचपन के जैसा तड़प रहा है।।

हम तो मोहब्बत पर
लिखते है और गाते है।
तभी तो मोहब्बत को
दिल से निभाते है।
और अपनी कलम के
द्वारा जिंदा रखते है।
तभी तो मोहब्बत के गीत
कविता लेख लिख पाते हैं।
और इंसानी मोहब्बत का
धर्म अपना निभाते है।
और लोगों के दिलों में
मोहब्बत के बीज बोते हैं।
जिससे स्नेह प्यार और अपनापन अंकुरित हो सके।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।