सोच बदलो गाँव बदलो

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अपने अपने गांवों से
हम बहुत प्रेम करते हैं।
इसलिए पड़ लिखकर
हम गाँव में रहने आ गये।।

अपने गाँव को हम
सम्पन्न बनाना चाहते हैं।
जिसे कोई भी गाँव वाले
रोजगार हेतु शहर न जाये।।

गाँव वालो से मिलकर
हम कुछ ऐसा काम करें।
ताकि अपने गांव को
आत्म निर्भर बना पाये।।

खुद के पैरों पर गाँव
अपना खड़ा हो जाये।
छोड़कर शहरों की जंजीरो को
नौ जवान गांवों में वापिस आये।।

आत्म निर्भर अपने गाँव को
करके हम दिख लाये।
जिसे देखने शहर वाले
अपने गाँव में आवे।।

गाँव के घर घर में
काम अब सब करते हैं।
गाँव की वस्तुये खरीदने को
शहर वाले गांवों में आते हैं।।

गाँव के सभी लोगों को
शिक्षित किया जा रहा।
बच्चें और बूड़े आज कल
स्कूलों में साथ पड़ते हैं।।

गांधीजी के स्वच्छय भारत का
सपना
हम मिलकर पूरा कर रहे हैं।
और गांधीजी को श्रध्दा सुमन
अर्पित मिलकर कर रहे हैं।।

गाँव को हम अपने
शहरों से सुंदर बना दिये हैं।
पर्यूषण मुक्त अपने गाँव को
हम मिलकर बना दिया हैं।।

इसलिए हम पड़ लिखकर
अपने गांव को लौटे हैं।
ताकि अपने गाँव को हम
आत्म निर्भर बना सके।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।