कर दिया कमाल

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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पुण्यतिथि विशेष

ना कोई खड्ग था,
ना ही कोई ढाल।
तेरी लाठी ने ही बापू,
कर दिया कमाल।

आँधियाँ बुझा ना पाईं,
बापू तेरी मशाल।
फिरंगियों का तूने,
किया था बुरा हाल।

माँ भारती का तुमसे,
देखा ना गया हाल।
तोड़नी थीं बेड़ियां,
गुलामी की हर हाल।

सत्य को तलवार बना,
अहिंसा को ढाल।
माँ भारती के लाल तूने,
कर दिया कमाल।

जीवन था तेरा सादा,
और उच्च थे विचार।
दुश्मन के सामने भी,
ना छोड़ा सदाचार।

काँटों भरी राह पर,
नंगे पैर चल दिये।
तेरे एक इशारे पे,
हज़ारों पैर चल दिए।

हो सत्याग्रह आंदोलन ,
या दांडी की यात्रा हो।
अंग्रेंजों की हार हो बस,
देश में पूर्ण स्वराज हो।

चरखे के ताने बाने से,
तूने रच डाला इतिहास।
फिरंगियों को चटा धूल,
तिरंगे की बचाई लाज।

गैरों में दम कहाँ था,
दगा अपने कर गए।
गोडसे से जालिम,
सीना छलनी कर गए।

अमर रहेगी गाथा तेरी,
अमर रहेगा नाम।
बापू जी तुम्हारे चरणों में,

शत शत है प्रणाम।

स्वरचित
सपना (स. अ.)
प्रा.वि. -उजीतीपुर
वि.ख.-भाग्यनगर
जनपद-औरैया

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।