
जो तुमको बुरा कहे
उसका तुम स्वागत करो
जो तुम्हारी निंदा करे
उसकी तुम प्रशंसा करो
उसके मन मे आई बुराई
जबान पर निंदा चढ़ आई
मुझ पर किया उसने वार
अस्वीकार किया मैंने प्रहार
उसकी स्तिथि बिगड़ती गई
मेरी स्तिथि बनती गई
वह क्रोध से लाल हुआ
मुझे क्रोध ने नही छुआ
मैं शांत स्वरूप बना रहा
उसका विवेक डिगा रहा
वह तन मन से बीमार हुआ
मैं प्रसन्न चित अपार हुआ
अच्छे बुरे मे भेद यही है
प्रभु का अज़ब खेल यही है।
#श्रीगोपाल नारसन

