
भौतिक उन्नति पथ बढ़ चले
मशीन की मानिद बन चले
जल्दी सोना हम भूल गए
जल्दी उठना भी भूल गए
सुबह शाम की संध्या याद नही
निस्वार्थ के रिश्ते भूल गए
दादी नानी की कहानी कहां गई
बचपन जीना ही सब भूल गए
दूध, दही ,घी और मठ्ठा
मक्खन-रोटी खाना ही भूल गए
बडो के सम्मान में सिर झुकाना
गुरुओ का सम्मान ही भूल गए
चरित्र निर्माण का पाठ पढ़ना
जीवन के मूल्यों को भूल गए।
#श्रीगोपाल नारसन

