इंसान को इंसान बनाएं

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आओ हम इंसान को इंसान बनाएं,
सबके दिलों में प्रेम की गंगा बहाएं।

जिओ और जीने दो का पाठ पढ़ाएं,
मानव को उनके अधिकार बताएं।

न कर सके किसी का कोई भी शोषण,
आओ जन जन को जागरूक बनाएं।

जाति धर्म लिंग भेद जड़ से मिटायें,
समानता और प्रेम के गीत हम गाएं।

दर्द भरे जीवन को मधुर संगीत बनाएं,
खुद भी हंसे हम और सबको भी हंसाएं।

आशा की छेड़ तान निराशा को भगाएं,
जीवन सफर को हम सब आसान बनाएं।

त्याग राग द्वेष को हम सन्नमार्ग अपनाएं,
अज्ञान के अंधेरों को हम जड़ से मिटायें।

एक दूजे के होंठों की मुस्कान बन जाएं,
मिल जुल कर हम प्रेम की वंशी बजाएं।

कांटो भरी राहों से बिल्कुल ना घबराएं,
हर कठिन परीक्षा को हम पास कर जाएं।

आओ इस धरा को हम सब स्वर्ग बनाएं।
हाथ जोड़ कर प्रभु के गुणगान हम गाएं,

स्वरचित
सपना (स. अ.)
जनपद – औरैया

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Tue Dec 15 , 2020
हिंदी राष्ट्रभाषा है,हमारी मातृभाषा है। दिलो को छू जाए, गौरवमई भाषा है।। कण कण में भगवान है,अक्षर अक्षर में मिठास है। हर अक्षर से शब्द बने, भावनाओ को व्यक्त करें।। हिंदी से हिंदूस्तान है, संस्कृत से संस्कार है। यहीं सभ्यता जन्मी, यही आस्थाओं की नगरी।। हिंदी के रूप अनेक है, […]

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।