अनुसुईया
की कठिन परीक्षा,
त्रिदेव ने ली
पालने में सुला दी थी
पुरुष प्रधानता।
अग्नि परीक्षा
सीताजी ने दी थी,
पुरषोत्तम
रामजी कहलाए
पुरुष प्रधानता।
हर युग में
दांव पर लगी है,
नारी अस्मिता
पांचाली लाचार थी,
पुरुष प्रधानता।
कलयुग में
हर कदम पर,
नारी परीक्षा
भोग की वस्तु बनी,
पुरुष प्रधानता।
माँ की परीक्षा,
बेटा परिणाम हो
तो माँ पास है,
बेटी आए तो फैल
पुरुष प्रधानता।
युग बदला
तो सोच भी बदलो,
कैसी परीक्षा
नारी को सम्मान दे,
पुरुष प्रधानता।
नारी सम्मान,
जिस घर में होता
इष्ट प्रसन्न,
परीक्षा लेना
बन्द कर दे अब,
पुरुष प्रधानता॥
#कैलाशचंद्र सिंघल
परिचय: कैलाशचंद्र सिंघल का नाता मध्यप्रदेश से हैl आपकी जन्म तारीख- २० दिसम्बर १९५६ और जन्मस्थान-धामनोद(धार) हैl हायर सेकन्डरी तक शिक्षित श्री सिंघल का व्यवसाय(कॉटन ब्रोकर्स)हैl आप धामनोद में समाज की संस्थाओं से जुड़े हुए हैंl लेखन में आपकी विधा-हाइकु,तांका, गीत और पिरामिड हैl भोपाल से प्रकाशित समाचार-पत्र में कुछ रचनाएं प्रकाशित हुई हैं। पिछले 30 वर्ष से लेखन में मगन श्री सिंघल की खासियत यह है कि,कवि सम्मेलनों का सफल आयोजन करते हैं। आपके लेखन का उद्देश्य-स्वान्तः सुखाय और दिवंगत कवियों की रचनाओं को मंचों पर सस्वर उनके नाम से प्रस्तुत करना है,जिसका पारिश्रमिक नहीं लेते हैं।
Fri Dec 1 , 2017
रात तुमसे मिली जो मेरी ये नजर, रंग खाबों के अब तक छूटे नहीं। पल दो पल ही सही साथ अपना सनम, हाथ ऐसे मिले फिर तो छूटे नहीं, तुमने हमको कहा इश्क का आसमां, हम जमीं बन रहे साथ छूटे नहीं। आंख क्यों कर खुले ये अमानत तेरी, इनकी […]