अंधेरे में उजाला बापू आप हो!

पूरे डेढ़ सौ बरस हो गए बापू
चाहे जंगल हो या फिर टापू
लगातार आपकी ख़ोज जारी है
आप नही मिले यह लाचारी है
पहले न्याय मंदिरो में मिलते थे
जज के पीछे तस्वीरों में सजते थे
अब वहां भी तस्वीर बदल गई
लगता है सच्चाई ही खो गई
आपने तो अहिंसा सिखाई
फिर भी वह क्यों नही भायी
गोड़से ने अहिंसा को कुचल डाला
गोलियों से आपको भून डाला
‘हे राम ‘कहकर आप चले गए
हम यहां ठगे से ही रह गए
सोचते थे अहिंसा गुल खिलाएगी
हिंसा स्वयं ही मारी जाएगी
पर यहां तो हिंसा का बोलबाला है
जगह जगह रावण बस गए
बताओ राम कब आने वाला है?
रावणो की हिंसा गर चलती रही
हाथरस की बेटी दम तोड़ती रही
मानवता शर्मसार होती रहेगी
शिकार फिर कोई बेटी होती रहेगी
अन्याय पर जो आवाज़ उठाता है
कानून उसे ही लाठी दिखाता है
राहुल गांधी भी धकिया दिए गये
संवेदना व्यक्त करने जो गये
बापू अब धैर्य जवाब दे रहा है
अराजकता में हर कोई जी रहा है
जहां भी हो, बापू चले आओ
अपने भारत को फिर से बचाओ
अंधेरे में उजाला बापू आप हो
अहिंसा के पुजारी बापू आप हो।
श्रीगोपाल नारसन
रुड़की (उत्तराखंड)

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