ज़माने के रंग

jitpal
जमाने के कई रंग देखे हैं हमने,
कभी तपती धूप,कभी बारिश में उजाले देखे हैं हमने।
जो इंसा सब कुछ खोने को तैयार है हमारे लिए,
उसी के काले निवाले देखें हैं हमने।
जब से होश संभाला है,धरती पर रेंगता है इंसान,
उसी इंसान को उड़ती हवाओं में देखा है हमने।
सोचता हूँ क्या धरोहर है खुदा की?जो रमती है कण-कण में,
उसी पत्थर को टूटते सड़कों पर देखा है हमने।
बहते पानी का रुख बदल दूँगा!,बड़े गुरूर से कहता है व्यक्ति,
उसी पानी में डूबते इंसा को देखा है हमने।
अब सोचकर देख ए अनमोल प्राणी,तेरी बातों की औकात क्या थी?
तेरी चिता पर अंगारों को सुलगते देखा है हमने।
मगरूरियत के वश में वशीभूत है या नशा है तुझे शाह-ए-शरीर का,
उन्हीं वेदांतों को बिलखते शव पर देखा है हमने।
न दौलत,न शौहरत,न महल है तेरा, बसेरे के लिए।
एक ही घाट पर फकीरों के साथ तुझे देखा है हमने।
                                                                    #जीतपाल सिंह यादव ‘आर्यवर्त’ 
परिचय: जीतपाल सिंह यादव ‘आर्यवर्त’ की जन्मतिथि-८ जुलाई १९९३ एवं जन्म स्थान-बंजरपुरी पवाॅसा सम्भल (उत्तर प्रदेश) है। शिक्षा-एमए(राजनीति शास्त्र)और कार्यक्षेत्र-अध्यापन और अध्ययन है। सामाजिक क्षेत्र में आपने गरीबों के लिए संघर्ष की दिशा में एक समिति बना रखी है। देवनागिरी लेखन के साथ ही गायन भी करते हैं। लिखने की प्रेरणा समाज से ही ली है।

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मां भारती

Fri Aug 11 , 2017
‘ह’ से अपना हिमालय, सिर छत्र मां का बनाएं। ‘स’ सूरज की लालिमा, मां के भाल लगाएं। सारे जहान में में हिन्दी को फैलाएं। मां भारती को हम हिन्दी से सजाएं॥ ‘म’ से मांग में तारे, केश गजरा लगाएं। काजल अमावस का, पूनम-सा रूप सजाएं। मां भारती को हम हिन्दी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।